Monday, July 13, 2026

शनिदेव 26 जनवरी 2017 को सायं 21:34 बजे वृश्चिक राशि से निकल कर धनु राशि में प्रवेश करेंगे। शनिदेव के इस राशि परिवर्तन के कई लोगों को शनि की “साढ़े साती” और “ढैय्या” से मुक्ति मिलेगी तो कई राशि वालों को शनि की साढ़े साती और ढैय्या लग जाएगी। शनि के धनु में प्रवेश करते ही तुला राशि को साढ़े साती से पूरी तरह से मुक्ति मिल जाएगी तो वृश्चिक राशि वालों के लिए साढ़ेसाती आरंभ हो जाएगी। इन दोनों राशियों के अलावा भी अन्य कई राशियां इससे बहुत अधिक प्रभावित होंगी।

ऐसे बनता है शनि की साढ़ेसाती, ढैय्या का योग
जब शनि ग्रह किसी व्यक्ति की जन्मराशि से बारहवें घर में आ जाता है तो साढ़ेसाती शुरू हो जाती है। यह प्रभाव व्यक्ति की कुंडली में तब तक रहता है जब तक शनि बारहवें घर के बाद पहले तथा दूसरे को पार कर तीसरे घर में नहीं आ जाता। चूंकि शनि एक राशि में ढाई वर्ष रहता है, इसलिए तीन राशियों से गुजरने के कारण शनि की यह दशा कुल साढ़े सात वर्ष रहती है जिसके आधार पर ही इसे साढ़ेसाती कहा जाता है।

शनि की ढैय्या
शनि साढ़े साती या शनि की ढैया की गणना चन्द्र राशि पर आधारित है। इसी प्रकार जन्मकुंडली में लग्न की राशि से गिनती करने पर यदि शनि चौथे या आठवें स्थान पर से गुजरे तो वह छोटी पनौती अर्थात ढैय्या कहलाती है। यह ढाई वर्ष की होती है।

ये होता है साढ़ेसाती और ढैय्या का प्रभाव
सामान्यतया साढेसाती जहां व्यक्ति के लिए कडे परिश्रम के बाद सौभाग्य लाती हैं वहीं ढैय्या व्यक्ति के लिए दुख लाती है। शनिदेव के अशुभ ग्रहों से युत या दृष्ट होने या नीचस्थ होने के कारण जातक को शनिदेव की साढ़े साती या ढैया की अवधि में शारीरिक या मानसिक कष्ट, रोग, कलह, धनाभाव, अपमान, दु:ख, अवनति जैसी विभिन्न समस्याओं से जूझना पड़ सकता है।

इन राशियों पर होगा शनि की साढ़ेसाती का सर्वाधिक असर

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