Monday, July 13, 2026

Poetry

नई सहर

किस तरह जिन्दगी अब गुजर किजिये चारों तरफ है गुनाहों

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Uncategorized

स्वप्न

कोयल की बोली से मैने, मीठी तान चुरा ली। मोरपंख

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Poetry

” झूला “

सावन के झूले पड़े सखी नन्ही नन्ही बूंदो की फुहार

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